सर्वनाम की परिभाषा, भेद और इसके उदाहरण : sarvanam in hindi

सर्वनाम की परिभाषा, भेद और इसके उदाहरण : sarvanam in hindi

सर्वनाम की परिभाषा -

संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।

सर्वनाम का अभिधार्थ है- सबका नाम। जो सबके नाम के स्थान पर आये, वे सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- मैं, तुम, आप, यह, वह, हम, उसका, उसकी, वे, क्या, कुछ, कौन आदि।

वाक्य में संज्ञा की पुनरुक्ति को दूर करने के लिए ही सर्वनाम का प्रयोग किया जाता है। सर्वनाम भाषा को सहज, सरल, सुन्दर एवं संक्षिप्त बनाते हैं। सर्वनाम के अभाव में भाषा अटपटी लगती है।

सर्वनाम की उदाहरण -

राम स्कूल गया है। स्कूल से आते ही राम राम का और मित्र का काम करेगा। फिर राम और मित्र खेलेंगे।

यह वाक्य कितना अटपटा, अनगढ़ और असुन्दर है। अब सर्वनामों से युक्त वाक्य देखिए- राम स्कूल गया है। वहाँ से आते ही वह अपने मित्र के घर जायेगा। फिर दोनों अपना-अपना काम करेंगे। फिर दोनों खेलेंगे।

सर्वनाम के भेद -

सर्वनाम के निम्नलिखित छः भेद होते हैं-

(1) पुरुषवाचक - मैं (हम), तुम (तू, आप), वह (यह, आप) )

( 2) निश्चयवाचक - यह (निकटवर्ती), वह (दूरवर्ती)

(3) अनिश्चयवाचक – कोई (प्राणिवाचक), क्या (अप्राणिवाचक)

(4) सम्बन्धवाचक जो ... सो (वह)

(5) प्रश्नवाचक - कौन (प्राणिवाचक), क्या (अप्राणिवाचक)

(6) निजवाचक आप (स्वयं, खुद)।

1. पुरुषवाचक सर्वनाम-

जिस सर्वनाम का प्रयोग वक्ता (बोलने वाला) या लेखक स्वयं अपने लिए अथवा श्रोता या पाठक के लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए करता है, उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- उसने, मुझे, तुम आदि।

पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन भेद होते हैं-

(1) उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम-

जिन सर्वनामों का प्रयोग बोलने वाला या लिखने वाला अपने लिए करता है, उन्हें उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- मैं, मेरा, हमारा, मुझको, मुझे, मैंने आदि।

(2) मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम-

जिस सर्वनाम का प्रयोग बोलने वाला या लिखने वाला सुनने वाले या पढ़ने वाले के लिए करे, उसे मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- तू, तुम, आप, तुझको, तुम्हारा, तुमने आदि।

(3) अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम-

जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग बोलने वाला किसी अन्य व्यक्ति के लिए करे, उन्हें अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह, वह, वे, उसे, उसको, इसने, उसने, उन्होंने, उनका आदि।

2. निश्चयवाचक सर्वनाम-

जिन सर्वनाम शब्दों से किसी दूरवर्ती या निकटवर्ती व्यक्तियों, प्राणियों, वस्तुओं और घटना-व्यापार का निश्चित बोध होता है, उन्हें निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह, वह, ये, वे, इन्होंने, उन्होंने आदि।

निकटवर्ती के लिए 'यह' तथा दूरवर्ती के लिए 'वह' का प्रयोग होता है। इस सर्वनाम को 'संकेतवाचक' या 'निर्देशक सर्वनाम' भी कहते हैं।

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम-

जिन सर्वनामों से किसी निश्चित व्यक्ति, वस्तु या घटना का ज्ञान नहीं होता, उन्हें अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे कोई, कुछ, किसी आदि।

प्राणियों के लिए 'कोई' व 'किसी' तथा पदार्थों के लिए 'कुछ' का प्रयोग किया जाता है।

जैसे-

  • रास्ते में कुछ खा लेना।
  • सम्भवतः कोई आया है।
  • वहाँ किसी से भी पूछ लेना।

4 . सम्बन्धवाचक सर्वनाम-

जो सर्वनाम शब्द किसी वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम का अन्य संज्ञा या सर्वनाम के साथ परस्पर सम्बन्ध का बोध कराते हैं, उन्हें सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहते हैं।

जैसे-

  • जो, जिनका, उसका आदि।
  • जो करता है, वह भरता है।
  • जिसका खाते हो उसी को आँख दिखाते हो।
  • जैसा करोगे वैसा भरोगे।
  • जिसकी लाठी उसकी भैंस।
  • जिसको आपने बुलाया था, वह आया है।

5 . प्रश्नवाचक सर्वनाम-

वह सर्वनाम जिसका प्रयोग किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु, क्रिया या व्यापार आदि के सम्बन्ध में प्रश्न करने के लिए किया जाता है, प्रश्नवाचक सर्वनाम कहलाता है। जैसे कौन, क्या, कब, क्यों, किसको, किसने आदि।

व्यक्ति या प्राणी के सम्बन्ध में प्रश्न करते समय 'कौन, किसे, किसने' का प्रयोग किया जाता है, जबकि वस्तु या क्रिया-व्यापार के सम्बन्ध में प्रश्न करते समय 'क्या, कब' आदि का प्रयोग किया जाता है।

जैसे-

  • देखो, कौन आया है?
  • यह गिलास किसने तोड़ा?
  • आप खाने में क्या लेंगे?
  • जयपुर कब जा रहे हो?

6. निजवाचक सर्वनाम-वह सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग बोलने वाला या लिखने वाला स्वयं अपने लिए करता है, निजवाचक सर्वनाम कहलाता है।

जैसे- आप, अपने आप, अपना, स्वयं, खुद, मैं, हम, हमारा आदि।

  • हमें अपना कार्य स्वयं करना चाहिए। 
  • मैं अपना काम खुद कर लूँगा।
  • मैं स्वयं आ जाऊँगा।
  • हमारा प्यारा राजस्थान।

सर्वनाम शब्दों के रूपान्तर-नियम :

(1) सर्वनाम का प्रयोग संज्ञा के स्थान पर होता है। अतः किसी भी सर्वनाम शब्द का लिंग और वचन उस संज्ञा के अनुरूप रहेगा जिसके स्थान पर उसका प्रयोग हुआ है।

  • जैसे- राम और उसका बेटा आया था।

(2) सर्वनाम का प्रयोग एकवचन और बहुवचन दोनों में होता है।

  • जैसे- मैं (हम), वह (वे), यह (ये), इसका (इनका)।

(3) सम्बन्धकारक के अतिरिक्त अन्य किसी कारक के कारण सर्वनाम शब्द का लिंग परिवर्तन नहीं होता।

जैसे-

  • मैं पढ़ता हूँ।
  • मैं पढ़ती है।
  • वह आया।
  • वह आई।
  • तुम स्कूल जाते हो। तुम स्कूल जाती हो।

(4) सर्वनाम से सम्बोधन कारक नहीं होता, क्योंकि किसी को सर्वनाम द्वारा पुकारा नहीं जाता।

( 5) आदर के अर्थ में एक व्यक्ति के लिए भी अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम का प्रयोग बहुवचन में होता है।

जैसे-

  • तुलसीदास महान कवि थे,
    उन्होंने हिंदी साहित्य को महान रचनाएँ प्रदान कीं।

(6) उत्तम पुरुष और मध्यम पुरुष सर्वनाम के बहुवचन का प्रयोग एक व्यक्ति के लिए भी होता है।

जैसे-

  •  हम (मैं) आ रहे हैं।
  • आप (तू) अवश्य आना।
  • तुम (तू) जा सकते हो।

(7) 'तू' सर्वनाम का प्रयोग अत्यन्त निकटता या आत्मीयता प्रकट करने के लिए, अपने से आयु व सम्बन्ध में छोटे व्यक्ति के लिए या कभी-कभी तिरस्कार प्रदर्शन करने के लिए एवं ईश्वर के लिए भी किया जाता है।

जैसे-

  • माँ! तू क्या कर रही है?
  • अरे नालायक! तू अब तक कहाँ था?
  • हे प्रभु ! तू मेरी प्रार्थना कब सुनेगा?

(8) मुझ, तुझ, तुम, उस, इन आदि सर्वनामों में निश्वयार्थ के लिए 'ई' () जोड़ देते हैं। जैसे उस (उसी), तुझ (तुझी), तुम (तुम्हीं), इन (इन्हीं)। (9) मैं, तुम, आप, वह, यह, कौन आदि सर्वनामों का निज-भेद उनके क्रिया-रूपों से जाना जाता है। जैसे-

  • वह पढ़ रहा है।
  • वह पढ़ रही है।

(10) पुरुषवाचक सर्वनामों के साथ 'को' लगने पर उनके रूप में अन्तर आ जाता है। जैसे-

  • मैं (को) मुझको या मुझे।
  • तू (को) तुझको या तुझे। 
  • यह (को) इसको या इसे।
  • ये (को) इनको या इन्हें।
  • वह (को) उसको या उसे।
  • वे (को) उनको या उन्हें।

(11) अधिकार अथवा अभिमान प्रकट करने के लिए आजकल 'मैं' की बजाय 'हम' का प्रयोग चल पड़ा है, जो व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है।

जैसे-

  • पिता के नाते हमारा भी कुछ कर्त्तव्य है।
  • शांत रहिए, अन्यथा हमें कड़ा रुख अपनाना पड़ेगा।

(12) जहाँ 'मैं' की जगह 'हम' का प्रयोग होने लगा है, वहाँ 'हम' के बहुवचन के रूप में 'हम लोग' या 'हम सब' का प्रयोग प्रचलित है।

(13) 'तुम' सर्वनाम के बहुवचन के रूप में 'तुम सब' का प्रचलन हो गया है। जैसे-

  • रमेश! तुम यहाँ आओ।
  • अरे रमेश, सुरेश, दिनेश! तुम सब यहाँ आओ।

(14) 'मैं', 'हम' और 'तुम' के साथ 'का', 'के', 'की' 'की जगह 'रा', 'रे', 'री' प्रयुक्त होते हैं।

  • जैसे- मेरा, मेरी, मेरे, तुम्हारा, तुम्हारे, तुम्हारी, हमारा, हमारे, हमारी। 

(15) सर्वनाम शब्दों के साथ विभक्ति चिह्न मिलाकर लिखे जाने चाहिए।

  • जैसे- मुझको, उसने, हमसे आदि।

(16) यदि सर्वनाम के बाद दो विभक्ति चिह्न आते हैं तो पहला मिलाकर तथा दूसरा अलग रखा जाना चाहिए।

  • जैसे- उनके लिए, उन पर से, हममें से, उनके द्वारा आदि। 

(17) यदि सर्वनाम तथा विभक्ति चिह्न के बीच 'ही', 'तक' आदि कोई निपात आ जाता है तो विभक्ति को अलग लिखा जाएगा।

  • जैसे- आप ही के लिए, उन तक से आदि।

सर्वनामों के पुनरुक्ति रूप : कुछ सर्वनाम पुनरावृत्ति के साथ प्रयोग में आते हैं। ऐसे स्थलों पर अर्थ में विशिष्टता या भिन्नता आ जाती है।

जैसे-

  • जो-जो-जो आता जाए, उसे बिठाते जाओ। 
  • कोई-कोई-कोई तो बिना बात भागा चला जा रहा था।
  • क्या हमारे साथ क्या-क्या हुआ, यह न पूछो।
  • कौन-मेले में कौन-कौन चलेगा?
  • किस-किस-किसको भूख लगी है?
  • कुछ मुझे कुछ-कुछ याद आ रहा है।
  • अपना-अपना-अपना सामान लो और चलते बनो।
  • आप-यजमान आप-आप ही खाए जा रहे थे,
  • मेहमानों की कहीं कोई पूछ नहीं थी।
  • वह-जिसे मिठाई न मिली हो, वह वह रूक जाओ।
  • कहाँ मैंने तुम्हें कहाँ-कहाँ नहीं ढूँढा।
  • कुछ सर्वनाम संयुक्त रूप में प्रयुक्त होते हैं। जैसे-
  • कोई-न-कोई-रात के समय कोई-न-कोई प्रबंध अवश्य हो जायेगा।
  • कुछ-न-कुछ घबराओ नहीं, कुछ-न-कुछ गाड़ी तो चलेगी ही

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