पदक्रम की सम्पूर्ण जानकारी

पदक्रम-

सरल वाक्य में वाक्य के विभिन्न अंग यथा- कर्त्ता, कर्म, पूरक, क्रिया विशेषण आदि सामान्य रूप से जिस क्रम में आते हैं, उस क्रम को 'पदक्रम' कहते हैं।

पदक्रम सभी भाषाओं में एक-सा नहीं होता। हिन्दी में कर्त्ता-कर्म-क्रिया का क्रम है तो अंग्रेजी में कर्त्ता-क्रिया-कर्म का क्रम है। वास्तव में वाक्य में पदों के उचित स्थान पर होने से ही सही अर्थ की प्राप्ति होती है। पदक्रम में थोड़ा-सा परिवर्तन हो जाने पर अर्थ का अनर्थ होने की संभावना बनी रहती है।

पदक्रम के नियम-

वाक्य में पदक्रम का सबसे साधारण नियम है कि पहले कर्त्ता या उद्देश्य, फिर कर्म या पूरक और अंत में क्रिया आती है, जैसे- बालक पुस्तक पढ़ता है।

हिन्दी में पदक्रम के कुछ प्रमुख नियम इस प्रकार हैं-

कर्ता के बाद क्रिया आती है।

जैसे-

  • राम सोता है।
  • मैं खेलता हूँ।

कर्ता और क्रिया के बीच कर्म आता है।

जैसे- 

  • अनिल आम खाता है।
  • सीमा स्कूल जाती है।

द्विकर्मक क्रियाओं में गौण कर्म पहले और मुख्य कर्म बाद में आता है।

जैसे-

  • सोहन ने श्याम को किताब दी।
  • मैंने अपने मित्र को पत्र लिखा।
  • पिताजी मेरे लिए साइकिल लाए।

कर्ता और क्रिया के बीच पूरक आता है।

जैसे-

  • कुशाल विद्यार्थी है।
  • राजवीर डॉक्टर है।

विशेषण संज्ञा के पूर्व आता है।

जैसे-

  • गीता ने नीली साड़ी पहनी है।
  • गोविन्द होशियार लडका है।

क्रिया-विशेषण क्रिया से पहले आता है।

जैसे-

  • घोड़ा तेज दौड़ता है।
  • हाथी धीरे-धीरे चलता है।

निषेधात्मक क्रिया-विशेषण क्रिया से पहले आता है।

जैसे-

  • मैं आज स्कूल नहीं जाऊँगा।
  • तुम्हें धूम्रपान नहीं करना चाहिए।

प्रश्नवाचक सर्वनाम जब विशेषण के रूप में प्रयुक्त होता है तो पहले आता है।

जैसे-

  • यहाँ कितने लोग हैं?
  • यह कैसी किताब है?

प्रश्नवाचक सर्वनाम या क्रिया विशेषण क्रिया से पहले आते हैं।

जैसे-

  • वह कौन है?
  • वह कहाँ जा रहा है?
  • तुम्हारा ऑफिस कहाँ है?

यदि उत्तर 'हाँ' या 'नहीं' में अपेक्षित हो तो 'क्या' मुख्यतः प्रारम्भ में और कभी-कभी अंत में लगता है।

जैसे-

  • क्या मनोहर कॉलेज गया था?
  • मनोहर कॉलेज गया था क्या?

संबोधन वाक्य के प्रारम्भ में आता है।

जैसे-

  • अरे कमल ! इधर आओ।
  • हे प्रभु! मेरी रक्षा करो।

पूर्वकालिक रूप 'कर' क्रिया के बाद जुड़ता है।

जैसे-

  • हाथ धोकर भोजन करो।
  • खाना खाकर जाना।

समानाधिकरण शब्द मुख्य शब्द के बाद आता है और बाद के शब्द में विभक्ति का प्रयोग होता है।

जैसे-

  • श्याम, तेरा भाई बाहर खड़ा है।
  • भवानी, लुहार को बुलाओ।

प्रश्नवाचक अव्यय 'न' बहुधा वाक्य के अंत में आता है।

जैसे-

  • आप वहाँ चलेंगे न?
  • तुम मेरे जन्मदिन की पार्टी में आओगे न?

जैसे-

संबंधवाचक विशेषण जैसे- जहाँ, तहाँ, जब तक, जैसे, तैसे आदि सामान्यतः वाक्य के अंत में आते हैं।

  • जब मैं कहूँ तब तुम चले जाना।
  • जहाँ तेरी इच्छा हो वहाँ जा।

निषेधात्मक अव्यय- न, नहीं, मत आदि बहुधा क्रिया के पहले आते हैं।

जैसे-

  • मैं नहीं जाऊँगा।
  • तुम मत डरो।

कर्ता का विस्तार कर्त्ता से पहले तथा क्रिया का विस्तार कर्त्ता के बाद आता है।

जैसे-

  • वृद्धा स्त्री को देखते-देखते होश आ गया।

यदि एक वाक्य में अनेक विशेषण प्रयोग किए गये हों तो सबसे पहले संकेत वाचक विशेषण, फिर संख्या वाचक या परिमाण वाचक और अंत में गुणवाचक विशेषण आता है।

जैसे-

  • मैंने ये दो पुराने पलंग बेचे हैं।

कर्त्ता और कर्म के मध्य में करण कारक आता है।

जैसे-

  • माता प्यार से अपने पुत्रों को भोजन कराती है।

अधिकरण कारक प्रायः वाक्य के बीच में आता है।

जैसे-

  • खाने की मेज पर रेडियो रखा है।

आग्रह व्यक्त करने वाला 'न' वाक्य के अंत में आता है।

जैसे-

  • कृपया मेरी बात मान लो न।

तो, भी, भर, ही आदि शब्द उन पदों के पूर्व प्रयुक्त होते हैं, जिन पर अधिक बल देना होता है।

जैसे-

  • मुख्यमंत्री भी आयेंगे।
  • तुम भी हमारे साथ चलो न।

समुच्चय बोधक अव्यय जिन शब्दों को जोड़ते हैं, उनके बीच में आते हैं

जैसे-

  • ग्रह एवं उपग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं।

हम उन्हें सुख देंगे, क्योंकि उन्होंने हमारे लिए बड़ा तप किया है।

विस्मयादिबोधक प्रायः वाक्य के प्रारंभ में आते हैं।

जैसे-

  • अरे! यह क्या हुआ? हे ईश्वर ! यह क्या हो गया?
  • मित्र ! तुम इतने समय कहाँ थे?

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