पदबंध किसे कहते हैं - पदबंध के भेद और उदाहरण

पदबन्ध की परिभाषा -

पदबन्ध- वाक्य में जब एक से अधिक पद मिलकर एक व्याकरणिक इकाई का काम करते हैं तब उस बंधी हुई इकाई को पदबन्ध कहते हैं।

जैसे-

पाँचवीं कक्षा में पढ़ने वाला छात्र राकेश बहुत बुद्धिमान है। 

हिन्दी पढ़ाने वाले गुरुजी ने मुझे एक अति सुन्दर और उपयोगी पुस्तक दी।

किसी व्यक्ति या समाज का उत्थान अनुशासन पर निर्भर है।

उक्त वाक्यों में नेवी रंग के अंश पदबन्ध का कार्य कर रहे हैं। पदबन्ध में विकारी और अविकारी दोनों प्रकार के शब्द हो सकते हैं और वे मिलकर व्याकरणिक इकाई पदबन्ध का कार्य करते हैं।

पदबन्ध के भेद-

पदबन्ध के आठ भेद हैं-

1. संज्ञा पदबन्ध-

जब कोई पद समूह वाक्य में संज्ञा का काम देता है तो उसे संज्ञा पदबन्ध कहते हैं।

जैसे-

(पास के मकान में रहने वाला आदमी) मेरा परिचित है।

(यह पेड़ तो किसी बड़े और तेज धार वाले कुल्हाड़े से) कट सकता है।

(देश के लिए मर मिटने वाला व्यक्ति सच्चा देशभक्त) होता है। उक्त वाक्यों में कोष्ठक में बंद वाक्यांश संज्ञा पदबन्द हैं।

2. सर्वनाम पदबन्ध

वाक्य में सर्वनाम का कार्य करने वाले पदबन्ध को सर्वनाम पदबन्ध कहते हैं।

जैसे-

  • (भाग्य का मारा मैं) कहाँ आ पहुँचा।
  •  (चोट खाए हुए तुम) भला क्या खेलोगे।
  • (है यहाँ ऐसा कोई!) जो साँप को पकड़ ले।
  • (हम सबको धोखा देने वाला तू.) आज स्वयं धोखा खा गया।
  • उक्त वाक्यों में कोष्ठक वाले वाक्यांश सर्वनाम पदबन्ध हैं।

3. क्रिया पदबन्ध-

एक से अधिक क्रिया पदों से बनने वाले क्रिया रूपों को क्रिया पदबन्ध कहते हैं।

जैसे-

  • कहा जा सकता है। 
  • जाता रहता था।
  • निकलता जा रहा है।
  • लौटकर कहने लगा। 

ये सभी वाक्य क्रिया पदबन्ध हैं।

4. विशेषण पदबन्ध-

जब कोई पद समूह किसी संज्ञा, सर्वनाम की विशेषता बताए तो उसे विशेषण पदबन्ध कहते हैं।

जैसे-

  • शेर के समान बलवान (आदमी)।
  • जोर-जोर से चिल्लाने वाले (तुम)।
  • सुन्दर और स्वच्छ लेख लिखने वाला (छात्र)।
  • सस्ता खरीदा हुआ (सामान)।
  • इस गली में सबसे बड़ा (घर)।

ये पद समूह संज्ञा व सर्वनाम की विशेषता प्रकट कर रहे हैं अतः विशेषण पदबन्ध हैं।

5. क्रिया-विशेषण पदबन्ध-

वह वाक्यांश या पद समूह जो क्रिया-विशेषण का कार्य करे उसे क्रिया-विशेषण पदबन्ध कहते हैं।

जैसे-

  • घर से लौटकर (जाऊँगा)।
  • पहले से बहुत धीरे (चलने लगा)। 
  • जमीन पर लोटते हुए (बोला)। में (बैठा)।
  • खुले आँगन 
  • बड़ी सावधानी से (उठाओ)।

इन वाक्यों में सभी पदबन्ध क्रिया विशेषण का कार्य कर रहे हैं। ये कोष्ठक में प्रदर्शित क्रिया की विशेषता बता रहे हैं।

6. सम्बन्ध बोधक पदबन्ध-

जो शब्द वाक्य में दो पदबन्धों के बीच सम्बन्ध स्थापित करावें, उन शब्दों को सम्बन्ध बोधक पदबन्ध कहते हैं। जैसे बदले, बजाय, पलटे, समान, योग्य, सरीखा, ऊपर, भीतर, पीछे से, बाहर की ओर आदि शब्द वाक्य में सम्बन्ध बोधक पदबन्द कहे जाते हैं। यथा-

  • राम की ओर।
  • छत के ऊपर। 
  • कृष्ण के समान आदि।

7. समुच्चय बोधक पदबन्द-

जो शब्द या वाक्यांश एक पदबन्ध को दूसरे शब्द या वाक्यांश से मिलाते हैं उन्हें समुच्चय बोधक पदबन्ध कहते हैं।

जैसे-

  • राम और श्याम विद्यालय जाते हैं।
  • तुम आओगे अथवा राजू आएगा। 

यद्यपि यह काम कठिन है तथापि तुम उसे कर सकते हो।

  • यदि तुम पर्वत पर जाओ तो साधुओं के दर्शन हो सकते हैं।
  • राकेश ने बहुत प्रयत्न किया परन्तु फिर भी वह हार गया।

उक्त वाक्यों में 'और', 'अथवा', 'यद्यपि', 'तथापि', 'यदि', 'तो', 'परन्तु' शब्द समुच्चय बोधक पदबन्ध हैं।

8. विस्मयादिबोधक पदबन्ध-

किसी वाक्य में 'हर्ष', 'शोक', 'आश्चर्य', 'लज्जा', 'ग्लानि' आदि मनोभावों को व्यक्त करने वाले शब्द विस्मयादिबोधक पदबन्ध कहलाते हैं।

जैसे-

  • अहा! आज तो मिठाईयाँ बन रही हैं।
  • हाँ! मैं भी तो सही कहता हूँ। 
  • ऐ! तुम फर्स्ट आ गए।
  • छिः छिः! फिर पकड़ा गया।

उक्त वाक्यों में 'अहा', 'हाँ', 'ऐ' तथा 'छिः छिः' विस्मयादिबोधक पदबन्ध हैं।

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