काल किसे कहते हैं - काल के भेद और उदाहरण

काल-विचार

काल- क्रिया के जिस रूप से कार्य सम्पन्न होने का समय (काल) जाना जाये, उसे काल कहते हैं।

जैसे-

1. सुमित्रा ने पत्र लिखा।
2. सुमित्रा पत्र लिखती 
3. सुमित्रा पत्र लिखेगी। है।

ऊपर लिखे तीनों वाक्यों में 'लिखना' क्रिया आई है। पहले वाक्य में 'लिखा' क्रिया बीते हुए समय का ज्ञान कराती है। दूसरे वाक्य में 'लिखती है' क्रिया वर्तमान समय का बोध कराती है और तीसरे वाक्य में 'लिखेगी' क्रिया आगे आने वाले समय का ज्ञान करा रही है।

काल के भेद-

काल के तीन भेद होते हैं-

  1. भूतकाल
  2. वर्तमान काल
  3. भविष्यत् काल ।

1. भूतकाल- क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय (अतीत) में कार्य संपन्न होने का बोध हो उसे भूतकाल कहते हैं।

जैसे-

  • राम ने पुस्तक पढ़ी।
  • राम पुस्तक पढ़ रहा था। 
  • राम पुस्तक पढ़ चुका था।
  • राम ने पुस्तक पढ़ ली होगी।

ऊपर लिखे चारों वाक्यों में 'पढ़ना' क्रिया आई है और चारों वाक्यों में इस क्रिया के अलग-अलग रूप हैं। चारों वाक्यों को पढ़ने से मालूम होता है कि 'पढ़ना' क्रिया का समय भूतकाल में समाप्त हो गया।

भूतकाल के निम्नलिखित छः भेद हैं-

1. सामान्य भूत।
2. आसन्न भूत। 
3. अपूर्ण भूत।
4. पूर्ण भूत।
5. संदिग्ध भूत।
6. हेतुहेतुमद भूत।

1. सामान्य भूत-

क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय में कार्य के होने का बोध हो किन्तु ठीक समय का ज्ञान न हो, वहाँ सामान्यभूत होता है।

जैसे-

(1) बच्चा गया। 
(2) श्याम ने पत्र लिखा।
(3) कमल आया।

2. आसन्न भूत-

क्रिया के जिस रूप से अभी-अभी निकट भूतकाल में क्रिया का होना प्रकट हो, वहाँ आसन्न भूत होता है।

जैसे-

(1) बच्चा आया है।
(2) श्याम ने पत्र लिखा है।
( 3) कमल गया है।

3. अपूर्ण भूत-

क्रिया के जिस रूप से कार्य का होना बीते समय में प्रकट हो, पर पूरा होना प्रकट न हो वहाँ अपूर्ण भूत होता है।

जैसे-

(1) बच्चा आ रहा था।
(2) श्याम पत्र लिख रहा था।
(3) कमल जा रहा था।

4. पूर्ण भूत-

क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कार्य समाप्त हुए बहुत समय बीत चुका है उसे पूर्ण भूत कहते हैं।

जैसे-

(1) श्याम ने पत्र लिखा था।
(2) बच्चा आया था।
(3) कमल गया था।

5. संदिग्ध भूत-

क्रिया के जिस रूप से भूतकाल का बोध तो हो किन्तु कार्य के होने में संदेह हो वहाँ संदिग्ध भूत होता है।

जैसे-

(1) बच्चा आया होगा।
(2) श्याम ने पत्र लिखा होगा। 
(3) कमल गया होगा।

6. हेतुहेतुमद भूत-

क्रिया के जिस रूप से बीते समय में एक क्रिया के होने पर दूसरी क्रिया का होना आश्रित हो अथवा एक क्रिया के न होने पर दूसरी क्रिया का न होना आश्रित हो वहाँ हेतुहेतुमद भूत होता है।

जैसे-

(1) यदि श्याम ने पत्र लिखा होता तो मैं अवश्य आता। 
(2) यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।

2. वर्तमान काल-

क्रिया के जिस रूप से कार्य के वर्तमान समय में होने का ज्ञान हो, उसे वर्तमान काल कहते हैं।

जैसे-

  • करुणा गीत गाती है।
  • करुणा गीत गा रही है।
  • करुणा गीत गाती होगी।
  • करुणा गीत गा चुकी होगी।

ऊपर लिखे सभी वाक्यों में 'गाना' क्रिया वर्तमान समय में हो रही है।

वर्तमान काल के निम्नलिखित तीन भेद हैं-

(1) सामान्य वर्तमान।
(2) अपूर्ण वर्तमान।
(3) संदिग्ध वर्तमान।

1. सामान्य वर्तमान-

क्रिया के जिस रूप से यह बोध हो कि कार्य वर्तमान काल में सामान्य रूप से होता है वहाँ सामान्य वर्तमान होता है।

जैसे-

(1) बच्चा रोता है।
(2) श्याम पत्र लिखता है। 
(3) कमल आता है।

2. अपूर्ण वर्तमान-

क्रिया के जिस रूप से यह बोध हो कि कार्य अभी चल ही रहा है, समाप्त नहीं हुआ है वहाँ अपूर्ण वर्तमान होता है। जैसे-

( 1) बच्चा रो रहा है। 
(2) श्याम पत्र लिख रहा है।
(3)कमल आ रहा है।

3. संदिग्ध वर्तमान-

क्रिया के जिस रूप से वर्तमान में कार्य के होने में संदेह का बोध हो वहाँ संदिग्ध वर्तमान होता है।

जैसे-

(1) अब बच्चा रोता होगा। 
(2 ) श्याम इस समय पत्र लिखता होगा।

3. भविष्यत् काल-

क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि कार्य भविष्य में होगा वह भविष्यत् काल कहलाता है।

जैसे-

  • श्याम पत्र लिखेगा।
  • शायद आज संध्या को वह आए

इन दोनों में भविष्यत काल की क्रियाएँ हैं, क्योंकि 'लिखेगा' और 'आए' क्रियाएँ भविष्यत काल का बोध कराती हैं।

भविष्यत् काल के निम्रलिखित दो भेद हैं-

1. सामान्य भविष्यत।
2. संभाव्य भविष्यत।

1. सामान्य भविष्यत-

क्रिया के जिस रूप से कार्य के भविष्य में होने का बोध हो उसे सामान्य भविष्यत कहते हैं।

जैसे-

(1) श्याम पत्र लिखेगा।
(2) हम घूमने जाएँगे।

2. संभाव्य भविष्यत-

क्रिया के जिस रूप से कार्य के भविष्य में होने की संभावना का बोध हो वहाँ संभाव्य भविष्यत होता है

जैसे-

(1) शायद आज वह आए। 
(2) संभव है श्याम पत्र लिखे।
(3) कदाचित संध्या तक पानी पड़े।

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