धार्मिक आंदोलन PDF

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धार्मिक आंदोलन

छठी शताब्दी ईसा पूर्व भारत में धार्मिक आंदोलन का प्रभाव देखने को मिला लोगों के विचारों में धार्मिक परिवर्तन देखने को मिल रहा था

जैन धर्म - जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव थे

जो स्वयं तप के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करते है और जो संसार रूप सागर से पार लगाने वाले तीर्थ की रचना करते है, वह तीर्थंकर कहलाते हैं।

प्रमुख जैन तीर्थंकर और उनके प्रतीक चिन्ह

जैन धर्म में कुल 24 तीर्थकर हुए थे

प्रतीक चिन्ह

पहले

सांड

ऋषभदेव

तेइसवें

पार्श्वनाथ

सर्प

चौबीसवें

महावीर स्वामी

शेर

जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे और इन्हें झारखंड के सम्मेद शिखर पर ज्ञान की प्राप्ति हुई

ज्ञान प्राप्ति के बाद इन्होंने 4 नियम बताएं जिसे चतुरायण धर्म कहां गया :-

1) हिंसा ना करना

2) सदा सत्य बोलना

3) चोरी ना करना

4) संपत्ति ना रखना

जैन धर्म के 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी हैं जिन्हें जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है

सांसारिक जीवनः महावीर स्वामी का जन्म 540 ईसा पूर्व में कुंडग्राम (वैशाली) में हुआ था

पिता:- सिद्धार्थ

पत्नीः- यशोदा

पुत्री:- प्रियदर्शनी

माता:- त्रिशला

भाई:- नंदिवर्धन

दामादः - जमाली

महावीर स्वामी के बचपन का नाम वर्द्धमान था

आध्यात्मिक जीवन महावीर स्वामी ने 30 वर्ष की उम्र में माता पिता की मृत्यु के पश्चात अपने बड़े भाई नंदीवर्धन से अनुमति लेकर सन्यास जीवन को स्वीकारा था 12 वर्षों के कठिन तपस्या के बाद महावीर स्वामी जी को ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे तपस्या करते हुए ज्ञान की प्राप्ति हुई और

ज्ञान प्राप्ति को "कैवल्य' कहा गया

इसी समय से महावीर स्वामी अर्हत (पूज्य), निरग्रंथ (बंधनहीन), जिन (विजेता) कहलाए

महावीर स्वामी जी ने अपने उपदेश प्राकृत भाषा में दिए इन्होंने पहला उपदेश राजगीर में दिया और अंतिम उपदेश पावापुरी में दिया

ज्ञान प्राप्ति के बाद महावीर स्वामी जी ने कुल 5 नियम बताएं जिसे पंचायन धर्म कहा गया :-

1) हिंसा ना करना

2) सदा सत्य बोलना

महावीर स्वामी ने त्रिरत्न दिए :-

3) चोरी ना करना

सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् आचरण

4) संपत्ति ना रखना

5) ब्रम्हचर्य

1) जैन धर्म में ईश्वर की मान्यता नहीं है 2) जैन धर्म में आत्मा की मान्यता है

3) महावीर स्वामी भी पुनर्जन्म और कर्मकाण्ड में विश्वास करते थे

72 वर्ष की आयु में महावीर स्वामी की मृत्यु (निर्वाण) 468 ईसा पूर्व

में बिहार राज्य के पावापुरी में हो गई

महावीर स्वामी के दो प्रमुख अनुयायी

स्थूलभद्र

भद्रबाहु

दिगंबर (नग्न रहने वाले)

श्वेतांबर (श्वेत वस्त्र धारण करने वाले)

मौर्य काल में 12 वर्ष का भीषण अकाल पड़ा जिसके कारण भद्रबाहु अपने अनुयायियों के साथ दक्षिण भारत में कर्नाटक चले गए और उनके साथ चंद्रगुप्त मौर्य भी आए थे जिन्होंने कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में "संलेखना" विधि के द्वारा अपने प्राण त्याग दिए

जैन धर्म के प्रचार के लिए दो जैन संगीतियां हुई

स्थूलभद्र

प्रथम

300 ईसा पूर्व

पाटलिपुत्र

(गुजरात)

द्वितीय

क्षमाश्रवण

छठी शताब्दी

जैन धर्म के कुछ प्रमुख राजा थेः- उदयिन, वंदराजा, चंद्रगुप्त मौर्य, कलिंग नरेश खारवेल, राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष, चंदेल शासक

प्रमुख जैन मंदिर

1) मौर्य काल में मथुरा जैन धर्म का प्रमुख केंद्र था। मथुरा कला का संबंध जैन धर्म से है

2) कर्नाटक के चामुंड शासकों ने श्रवणबेलगोला में विशाल बाहुबली की मूर्ति (गोमतेश्वर की मूर्ति) का निर्माण करवाया

3) मध्यप्रदेश में चंदेल शासकों ने खजुराहो में जैन मंदिरों का निर्माण करवाया

4) राजस्थान के माउंट आबू में दिलवाड़ा के प्रसिद्ध जैन मंदिर है।

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